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बिजासन माता मंदिर की जानकारी

नमस्कार दोस्तों Bijasan Mata Mandir  में आपका स्वागत है। आज हम इंदरगढ़ में विराजमान श्री बिजासन माता मंदिर के बारें में पूरी जानकारी बताने वाले है।

1.Where are you bijasan Mata Mandir (बिजासन माता मन्दिर कहाँ है):- राजस्थान का प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक व धार्मिक आस्था का केन्द्र श्री बिजासन महारानी का मन्दिर राजस्थान राज्य के बून्दी जिले के इन्दगढ नामक शहर में स्थित हैं।

2.इस मन्दिर की मान्यताएं:-
इन्द्रगढ़ में एक विशाल पहाड़  की गुफा में बिजासण माता का मंदिर स्थिति है जिसकी बहुत लोकमान्यता है। आस-पास के क्षेत्र में इन्द्रगढ़ देवी के नाम से भी प्रसिद्ध हैं ।

भक्तु सुखी और समृद्ध वैवाहिकजीवनी के लिए नवविवाहिता दम्पत्ति माता से आशीर्वाद लेने के लिए माँ के दरबार आते हैं ।

यहाँ पर आने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। जैसें ( लकवा,चेहरे आना नेत्र के सभी रोग,मानसिक रूप से कमजोर,भूत-प्रेतों आदि)



बिजासन माता यहाँ कैसे आई जानें: एक बड़े सिद्ध कृपानाथ महाराज देवी के बहुत बड़े भक्त थे। बाबा देवी को प्रसन्न् करने के कठिन तपस्या किया करते थे।

  • कुछ महीनों में देवी एक बड़े सिद्ध कृपानाथ महाराज देवी के बहुत बड़े भक्त थे। बाबा देवी को प्रसन्न् करने के कठिन तपस्या किया करते थे।    बाबा की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात्  दर्शन दिए देवी दर्शन के बाद बाबा ने वरदान मे  यहाँ रहकर धर्म की रक्षा ओर लोक कल्याण करने के लिए यहाँ विराजमान होने को कहा ओर उनके शिष्य सोलंकी राजा के वशं को सेवा करने का वर दिया। 

  • तक से माँ बिजासन बाबा को वचन दे कर पहाड़ फोड़ कर प्रकट हुई थी ।इसी दरा गांव में गुरुगुजी कृपानाथ ने आसन जमाया । जिन की तपस्थली दरा गांव में आज भी स्थित है।
  • कहते हैं कि कृपानाथ जी से देवी की साक्षात बातें हो ती थी ।

  •  बाबा जब देवी की तपस्या में लीन थे तब
  • कृपानाथ बाबा के पास अपना राज-पाट सब छोड़ कर  सोलंकी नरेश बाबा की सेवा करने लगा गुरु बाबा ने राजा को वापस लौट कर अपना का राज-काज संभालने को कहा मगर राजा ने उनका सानिध्य और शिष्यता स्वीकारते हुए राजकाज छोड़ उनके

  • साथ ही रहना स्वीकार किया । कुछ समय बाद
  • उनकी पत्नी भी उन्हें ढूंढती ढूंढती यहां आ पहुंची और अपने स्वामी को सिद्ध बाबा कृपानाथ जी के शिष्य के रूप में पाया तब राजा और रानी दोनों ने
  • गुरुगु कृपानाथ की शिष्यता स्वीकारते हुए नाथ
  • संप्रदाय को अपना लिया

  • आजीवन बिजासन माता की भक्ति और गुरुगु जी की सेवा की जिससे यह सोलंकी योगी कहलाए इनके बाद इनके वंशजों ने बिजासन माता की पूजा सेवा जारी रखी ।

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